Logo
Logo

Aakhiri Baazee (Hindi Edition)

Price: ₹29.00
(as of Oct 05,2022 21:07:44 UTC – Details)


About the book
हर कहानी के दो पहलू होते हैं मुंबई में हुए 26/11 के आतंकी हमलों के ग्यारह साल बीत चुके थे, लेकिन उसके जख्म अब तक नहीं भरे थे। खास तौर पर पुलिस अधीक्षक विक्रांत सिंह के। आजकल राष्ट्रीय जाँच एजेंसी के साथ जुड़े, विक्रांत भारत के दौरे पर आए, पाकिस्तानी उच्चायुक्त जाकिर अब्दुल रऊफ खान से किसी तरह एक मुलाकात तय कर लेते हैं। जहाँ तक विक्रांत का दावा है, वह केवल खान से यह अपील करना चाहते हैं कि अपराधियों को पकड़ने की प्रक्रिया को तेज किया जाए, लेकिन मुलाकात का अंत उच्चायुक्त के मुझेहाँह पर पड़े एक मुक्के से होता है। इस बीच, भोपाल में, इंडियन मुजाहिदीन के पाँच सदस्य, जिन्हें विक्रांत ने मुंबई में आतंकवादी हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था, सेंट्रल जेल से भाग निकलते हैं। हाल ही में राजनयिक के साथ हुई झड़प के मामले में निलंबित विक्रांत से, भागे हुए आतंकियों का पता लगाने में, अनाधिकारिक रूप से मदद करने को कहा जाता है। देश के एक दूसरे हिस्से में, एक रिटायर्ड प्रोफेसर, टूटे दिल वाला एक पूर्व सैनिक और अपनी ही मुसीबतों से घिरी एक युवती अपने बारे में गहराई से सोचने के लिए मुंबई से लक्षद्वीप जा रहे एक क्रूज लाइनर पर एक यात्रा पर निकल पड़ते हैं। हालाँकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, और क्रूज लाइनर को हाईजैक कर लिया जाता है। रहस्य, रोमांच, सस्पेंस, राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और ऐसे अनेक पहलूओं की अनूठा मिश्रण है यह पुस्तक जो पाठक को बाँधे रहेगी और फिल्म देखने का आनंद देगी। मसालेदार और दिलचस्प, हुसैन जैदी का जवाब नहीं।


From the Publisher

Aakhiri Baazee by S. Hussain Zaidi

Aakhiri Baazee by S. Hussain ZaidiAakhiri Baazee by S. Hussain Zaidi

रहस्य, रोमांच, सस्पेंस, राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और ऐसे अनेक पहलूओं की अनूठा मिश्रण है यह पुस्तक जो पाठक को बाँधे रहेगी और फिल्म देखने का आनंद देगी

हर कहानी के दो पहलू होते हैं मुंबई में हुए 26/11 के आतंकी हमलों के ग्यारह साल बीत चुके थे, लेकिन उसके जख्म अब तक नहीं भरे थे। खास तौर पर पुलिस अधीक्षक विक्रांत सिंह के। आजकल राष्ट्रीय जाँच एजेंसी के साथ जुड़े, विक्रांत भारत के दौरे पर आए, पाकिस्तानी उच्चायुक्त जाकिर अब्दुल रऊफ खान से किसी तरह एक मुलाकात तय कर लेते हैं। जहाँ तक विक्रांत का दावा है, वह केवल खान से यह अपील करना चाहते हैं कि अपराधियों को पकड़ने की प्रक्रिया को तेज किया जाए, लेकिन मुलाकात का अंत उच्चायुक्त के मुझेहाँह पर पड़े एक मुक्के से होता है। इस बीच, भोपाल में, इंडियन मुजाहिदीन के पाँच सदस्य, जिन्हें विक्रांत ने मुंबई में आतंकवादी हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था, सेंट्रल जेल से भाग निकलते हैं। हाल ही में राजनयिक के साथ हुई झड़प के मामले में निलंबित विक्रांत से, भागे हुए आतंकियों का पता लगाने में, अनाधिकारिक रूप से मदद करने को कहा जाता है। देश के एक दूसरे हिस्से में, एक रिटायर्ड प्रोफेसर, टूटे दिल वाला एक पूर्व सैनिक और अपनी ही मुसीबतों से घिरी एक युवती अपने बारे में गहराई से सोचने के लिए मुंबई से लक्षद्वीप जा रहे एक क्रूज लाइनर पर एक यात्रा पर निकल पड़ते हैं। हालाँकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, और क्रूज लाइनर को हाईजैक कर लिया जाता है। मसालेदार और दिलचस्प, हुसैन जैदी का जवाब नहीं।

==================================================================================================================

अनुक्रम

आभार

आख़िरी बाज़ी

S. Hussain ZaidiS. Hussain Zaidi

S. Hussain Zaidi

एस. हुसैन जैदी तफ्तीश, अपराध और आतंक की खबरें देने में मुंबई की मीडिया के माहिर माने जाते हैं। उन्होंने एशियन एज, मुंबई के स्थानीय संपादक; मुंबई मिरर, मिड-डे और इंडियन एक्सप्रेस के संपादक (इन्वेस्टिगेशंस) के रूप में काम किया है। वे ब्लैक फ्राइडे, डोंगरी टु दुबई, माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई और बायकुला टु बैंकॉक समेत कई सर्वाधिक बिकनेवाली किताबों के लेखक हैं। उनकी सबसे नई रचना है डेंजरस माइंड्स। उनकी कई किताबों पर फिल्में बन चुकी हैं, जिनमें किताब के शीर्षक के नाम पर बनी फिल्म ब्लैक फ्राइडे, जिसका निर्देशन अनुराग कश्यप ने किया, शूटआउट एट वडाला, जो डोंगरी टु दुबई पर आधारित है एवं जिसका निर्देशन संजय गुप्ता ने किया और फैंटम, जो मुंबई एवेंजर्स पर आधारित है, जिसके निर्देशक हैं कबीर खान, प्रमुख हैं।

ASIN‏:‎B08261JY18
Publisher‏:‎Prabhat Prakashan (30 November 2019)
Language‏:‎Hindi
File size‏:‎1454 KB
Text-to-Speech‏:‎Enabled
Screen Reader‏:‎Supported
Enhanced typesetting‏:‎Enabled
Word Wise‏:‎Not Enabled
Print length‏:‎287 pages

29.00